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भव सागर खुशियां संसार सागर क्याहैकुंठा-घुटनक्याहैव्यथा-निराशा लकिरऔरतकदीर दिन हो या रात हो अद्भूत सागर को गागर मानव देह जीवन रूपी सागर दयालु भाव कलियुग सरितादुबे साहित्यिक विधा ध्यान सुख सागर अहितकारी चैन हित यात्रा पथ शुभता का भाव

Hindi सागर प्रधान Quotes