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दयालु भाव लकिरऔरतकदीर झूकाकर ज्ञान और आनंद समाना अवलंबन सुख सागर धूप -छांव मैंऔरमेरीकविताएं बाधा रूपी लहरों को चीर कर मां की दया मन के भावों आशा मानव देह कर्म प्रधान पुरुषोत्तम सरितादुबे ड़ूब संसार सागर रूखसतहोगाकोईतोरोएंगेयेजिस्मोजां/आआकेमिलकेजाएंवो-/होगातभीजन्नतेजहां

Hindi सागर प्रधान Quotes